नहीं चाहिए विद्यजनो से, निस दिन पूजा जाऊँ,

चाह नहीं इस पद पर रहकर, जन जन में इतराऊँ

मुझे चाहिए विद्यालय का, हर बालक गुणवान बने,

कर्णधार हो देश का अपने, अतिविशिष्ट विद्वान बने||

शिक्षा किसी भी राष्ट्र की नियति को आकार देती है, यह ठीक ही कहा गया है। तकनीकी अर्थ में शिक्षा वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा समाज अपने संचित ज्ञान, कौशल और मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जान-बूझकर प्रसारित करता है। संक्षेप में, शिक्षा कोई भी अनुभव है जिसका किसी व्यक्ति के मन, चरित्र और शारीरिक क्षमता पर रचनात्मक प्रभाव पड़ता है।

       पोर्ट ब्लेयर ईश्वर के प्रेम और मनुष्य की सेवा के आधार पर अकादमिक उत्कृष्टता, कौशल और चरित्र निर्माण के विकास के लिए है। स्कूल भारत की सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध विविधता को संरक्षित और बढ़ावा देने के लिए उत्सुक है। हम अपने बच्चों के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए पर्याप्त अवसर प्रदान करते हैं। हम इस तथ्य से भी प्रोत्साहित होते हैं कि हमारी सेवा की मांग साल-दर-साल बढ़ती जा रही है।
           यह संस्था वर्तमान में एक माध्यमिक विद्यालय है जिसमें कक्षा 6 से 12 तक है। हर दृष्टि से बुनियादी ढांचा बहुत अच्छा है। स्कूल माध्यमिक शिक्षा परिशद, प्रयागराज, उ०प्र्० से मन्यता प्राप्त है।

        मैं अपने सभी छात्रों को उनके शैक्षिक प्रयासों में सफलता की कामना करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वे चारों ओर खुशी फैलाने के लिए बौद्धिक और भावनात्मक रूप से संतुलित रूप से विकसित हों।
धन्यवाद

मार्तंड देव पांडेय 
प्रधानाचार्य